greece coronavirus: कभी कर्ज तले दबा था ग्रीस, अब Corona से लड़ाई में बना ‘यूरोप की ढाल’ – greece fights coronavirus pandemic with early planning and timely decisions


Shatakshi Asthana | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

प्रतीकात्मक तस्वीर

एथेंस

कोरोना वायरस के फैलने के साथ ही ग्रीस ने फरवरी में जब पब्लिक इवेंट्स पर रोक लगाई तो लोगों को लगा कि इसकी जरूरत नहीं है और विरोध तक किया गया। हालांकि, शुरुआती कदम की नतीजा यह हुआ कि देश में अब तक कोरोना के चलते सिर्फ 81 लोगों की मौत हुई है जबकि पड़ोसी देश इटली में 17,000 लोगों की जान चली गई है। अगर जनसंख्या पर भी नजर डालें तो इटली का मृत्युदर 40 गुना ज्यादा है। ग्रीस में अब तक 1,832 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं और 81 लोगों की मौत हो चुकी है।

एक भी मौत से पहले शुरू लॉकडाउन

ग्रीस में मरने वालों का आंकड़ा बेल्जियम, नीदरलैंड्स जैसे देशों से कम रहा है जबकि इनका जीडीपी ज्यादा है और लगभग एक जैसी जनसंख्या है। प्रधानमंत्री किरियाकोस मिट्सोटाकीज ने हाल ही में बताया कि सरकार की संवेदनशीलता, समन्वय, इच्छाशक्ति और तेजी इकनॉमिक चिंता के मुद्दे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले कि एक भी मौत होती, स्कूल बंद हो गए। ज्यादातर देशों ने एक-दो हफ्ते बाद यह कदम उठाया जब उनके दर्जों नागरिकों की जान चुकी थी।

सिर्फ डिफेंस का ही हथियार

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीस ने वक्त रहते प्रफेशनल और मैनेजरीयल रुख अपनाया। ग्रीस के पास इस आपदा से निपटने के लिए ज्यादा संसाधन भी नहीं थे। देश में हेल्थकेयर पर खर्चा तीन-चौथाई तक कम कर दिया गया है। यहां पिछले महीने सिर्फ 560 इंटेसिंव केयर बेड्स हुआ करते थे, अब यहां 910 बेड है और 4,000 से ज्यादा नर्स और डॉक्टर्स को काम पर लगाया जा चुका है। यहां बुजुर्गों की आबादी भी करीब एक-चौथाई है। ऐसे में ग्रीस के पास यही विकल्प था कि पहले ही डिफेंस तैयार किया जाए।

…बन गया यूरोप की ढाल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2010 से आर्थिक संकट का सामना कर रहे ग्रीस को दरअसल ऐसी स्थिति का सामना करने का अच्छा अनुभव हो गया है। मिट्सोटाकीज को इस बीच शरणार्थियों को रास्ता नहीं देने के फैसले के लिए आलोचना का सामना भी करना पड़ा लेकिन उसका नतीजा देश पर क्या हुआ, यह देखा जा सकता है। यूरोप के बाकी देश अब ग्रीस की ओर देख रहे हैं और उसे ‘यूरोप की ढाल’ तक कहा जा रहा है।

आर्थिक संकट का रिस्क

पहले एक बड़े आर्थिक संकट के कारण अपनी प्रतिष्ठा पर चोट खा चुके ग्रीस के लिए एक और आर्थिक संकट के लिए तैयार होना आसान फैसला नहीं था। हालांकि, यह बात सरकार को पता थी कि लॉकडाउन शुरू में न सही, तो बाद में करना ही पड़ेगा। ऐसे में महामारी भी फैल चुकी होगी और फिर आर्थिक नुकसान ज्यादा होगा। इसलिए पहले ही सिनेमा, रेस्तरां, दुकानें, टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स, म्यूजियम, यहां तक कि रीटेल और सर्विस इंडस्ट्री जैसी चीजों को बंद कर दिया गया जो अर्थव्यवस्था का आधार हैं। इससे मार्च और अप्रैल में ही 5.1 बिलियन यूरो का नुकसान ग्रीस को हुआ है लेकिन यह जरूरी था।

(Source: Al Jazeera)



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