मुक्तसर के रेल ट्रैक पर किसानों के धरने में पहुंचे कई पंजाबी गायक, केंद्र के साथ-साथ सूबे की कैप्टन सरकार को भी कोसा





कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदेशभर में जारी प्रदर्शन के दौर में सोमवार को मुक्तसर में रेल ट्रैक पर बैठे किसानों के बीच कई लोक गायक भी पहुंचे। कलाकारों ने न सिर्फ केंद्र सरकार के झुकने की संभावना जताई, वहीं पंजाब की कांग्रेस सरकार को भी कोसा। गायकों कंवर ग्रेवाल, गुरविंदर बराड़, हरफ चीमा और समाजसेवी लक्खा सिधाना ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के संघर्ष को खत्म करना चाहती है, तभी तो कोयले, खाद और जरूरी वस्तुओं की रेलगाड़ियों से संबंधित बात की जा रही है।

दरअसल, बीत दिन पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने किसानों के प्रदर्शन को लेकर एक बयान दिया। बादल ने कहा था कि बॉर्डर पर फौजियों का रशद और गोली सिक्का खत्म हो गया है। पंजाब में भी कोयला और दूसरी चीजें खत्म हो चुकी हैं। इसी के चलते थर्मल पावर स्टेशन बंद होने के कगार पर हैं और सूबे में आने वाले दिनों में बिजली का संकट गहरा सकता है। इसी बयान पर पलटवार करते हुए सोमवार को मुक्तसर के धरने में शामिल पंजाबी लोक गायक कंवर ग्रेवाल, गुरविंदर बराड़, हरफ चीमा और समाजसेवी लक्खा सिधाना ने कहा कि जिस तरह एकजुटता से संघर्ष चल रहा है, केंद्र सरकार को इस खेती कानूनों के मामले में झुकना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब के हर वर्ग को इस संघर्ष में अपना बनता योगदान डालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अब जब संघर्ष को हर वर्ग का साथ मिलना शुरू हुआ तो ऐसी बातें लोगों में पहुंचाकर पंजाब सरकार लोगों को संघर्ष से दूर करने की चाल चल रही है। सरकार इस तरह की चर्चा शहर और गांव में फैलाकर किसानी संघर्ष को फेल करने की चाल चल रही है कि यदि किसान रेल ट्रैक से नहीं उठे तो बिजली के कट शुरू हो जाएंगे या फिर खाद की और जरूरी वस्तुओं की बड़ी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि किसानों का संघर्ष खेती बिलों के विरुद्ध है और यह संघर्ष जब तक किसी मुकाम पर नहीं पहुंचता, जिस तरह की भी किसान संगठन संघर्ष की रूपरेखा तैयार करेंगी, पंजाबी गायक हर जगह उनका साथ देंगे।

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मुक्तसर मेंं रेल ट्रैक पर धरने पर बैठे किसानों के बीच पहुंचे लोकगायक कंवर ग्रेवाल, गुरविंदर बराड़, हरफ चीमा और समाजसेवी लक्खा सिधाना।



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