Army Helicopter Crash: अब तक नहीं लगा हेलीकाप्टर के दोनों पायलटों का पता, मटमैला पानी बढ़ा रहा समस्या

 

(पठानकोट)। रणजीत सागर बांध की झील में गिरे सेना के ध्रुव हेलीकाप्टर के लापता पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल अभिजीत सिंह व सह पायलट कैप्टन जयंत जाेशी का वीरवार को 10वें दिन भी पता नहीं लग पाया है। झील 25 किलोमीटर लंबी, आठ किलाेमीटर चौड़ी व 500 फीट गहरी है। रणजीत सागर झील की 80 मीटर गहराई में गिरे हेलीकाप्टर होने का पता लगा लिया है। पानी मटमैला होने के कारण सेना के जवानों व गोताखोरों को तलाश करने में परेशानी आ रही है। गोताखोर अंदर नहीं जा पा रहे हैं। इतना ही नहीं कैमरों से फोटो क्लियर नहीं आ रही है।

अंधेरे में दूर तक मलबे में छिपी वस्तु को रेडियो तरंगों से तलाशने में सक्षम विशेष सोनार के काेची से पहुंचने के बाद झील के 60 वर्ग मीटर हिस्से में 500 फीट की गहराई को खंगालने के लिए सेना ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सेना, एनडीआरएफ, एयरफोर्स, नेवी के विशेष गोताखोर चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई और कोच्चि से बचाव करने पहुंचे हैं। झील का पानी मटमैला होने और तलहटी में गाद होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

बता दें कि तीन अगस्त की सुबह 10:50 बजे सेना के ध्रुव एएलएच मार्क-4 हेलीकॉप्टर ने मामून कैंट से सुबह 8:30 बजे उड़ान भरी थी। इसमें पायलट और को पायलट सवार थे। झील के ऊपर हेलिकाप्टर नियंत्रण से बाहर हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झील के पानी की सतह से टकराकर उसके तीनों ब्लेड टूट गए थे। इसके बाद जोरदार धमाका हुआ था। पिछले एक सप्ताह से सेना, एयरफोर्स और नेवी के संयुक्त दस्ते झील में हेलिकाप्टर के मलबे और पायलट और को पायलट की तलाश में जुटे हुए हैं। हालांकि विभिन्न कारणों से अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है।

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