असलियत में शहर के 90 फीसदी इलाकों में नहीं होती पुलिस गश्त


लुधियाना शहर में लगातार क्राइम व बदमाशों का लोगों में खौफ बढ़ता जा रहा है। इसका अहम कारण है कि लोगों के बीच पुलिस की मौजूदगी कम होना। क्योंकि इलाकों में न तो पुलिस की गश्त होती है और न ही पीसीआर दस्ता गश्त करता है। जिस कारण लगातार वारदातें हो रही है। पुलिस अफसरों का दावा है कि पीसीआर मुलाजिम हर इलाके हर गली में गश्त करते है। लेकिन लोगों से बातचीत कर इसकी असलियत जानी गई। जिससे पता चला कि 90 प्रतिशत इलाके ऐसे हैं, जहां पर पीसीआर मुलाजिमों की गश्त होती ही नहीं हंै। जिसके चलते बदमाश खुलेआम घूमकर वारदातें करते हैं। शहर में कुल 550 पीसीआर मुलाजिम हंै। जबकि 77 मोटरसाइकिलें और 25 गाडिय़ां हंै। लेकिन उसके बाद भी कई इलाके ऐसे हैं जहां पर छह महीने के अधिक समय से मुलाजिमों ने गश्त नहीं की। वैसे तो पुलिस लगातार गश्त होने और हर बार गश्त बढ़ाने की बात कहती है। लेकिन दूसरी तरफ कुछ अफसर वाहनों की कमी होने के कारण सभी इलाके कवर न कर पाने की बात कहते हंै। लेकिन पुलिस की इस ढीली कार्यप्रणाली का नतीजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। यदि मुलाजिम गश्त करे तो लोगों में भी सुरक्षा की भावना पैदा होती है। 

पहले पुलिस कमिश्नर रहे प्रमोद बान की ओर से 2015 में पीसीआर बाइकों और गाड़ियों पर जीपीएस सिस्टम लगाया गया था। ताकि इसके साथ मुलाजिमों को ट्रैक किया जा सकेगा। उनकी लोकेशन पता करने के साथ साथ उन्होंने किस किस इलाके में गश्त की और कहा पर कितना समय खड़े सब कुछ पता चलना था। लेकिन कुछ महीने चलने के बाद जीपीएस बंद होने शुरू हो गए। आखिर में अब 99 प्रतिशत जीपीएस काम ही नहीं कर रहे। पीसीआर विभाग के अफसर अभी भी जीपीएस चलने का दावा करते है। लेकिन असलियत में वह एक बार खराब होने के बाद दोबारा नहीं चल सके।

2015 में पीसीआर मोटरसाइकिलों पर जीपीएस सिस्टम लगने पर हरी झंडी देकर मुलाजिमों को रवाना करते हुए पूर्व सीपी। फाइल फोटो

एक ही जगह व नाकों पर खड़े दिखाई देते हैं मुलाजिम

पीसीआर की ड्युटी इलाकों में गश्त करने की होती है। लेकिन पीसीआर मुलाजिम एक ही जगह व कई नाकों पर खड़े दिखाई देते है। जिस वजह से इलाकों में गश्त नहीं हो पाती। कई बार मुलाजिम गलियों में नाके लगाकर खड़े हो जाते है तो कभी सड़क पर खड़े होकर वहां से गुजर रहे वाहन चालकों की चेकिंग करते दिखाई देते हंै। कई इलाके के लोगों द्वारा इस संबंधी शिकायतें भी की जाती है। लेकिन फिर भी हल नहीं हो पाता। जबकि कई जगह तो मुलाजिम बैंक के एटीएम रूम की चैकिंग के दौरान वहीं पर आराम फरमाते देखे जा चुके हंै।

शिकायतों पर भी नहीं होती सुनवाई

पिछले एक साल से पीसीआर का कोई भी मुलाजिम गश्त करने नहीं आया। इलाके में आए दिन वाहन चोरी होने की वारदातें होती हैं। जबकि एक हफ्ता पहले घर की दीवार पर खून से सने कपड़े मिले, ऐसे लगता था कि बाहर सड़क पर दो पक्ष आपस में भिड़े हों। पीसीआर के लिए कई बार शिकायतें की। मगर कोई हल नहीं हुआ। – काला, जमालपुर वासी।

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हैं मुलाजिम। शहर की सुरक्षा राम भरोसे ही होती है।

2015 में पीसीआर बाइक, गाड़ियों पर लगाया था जीपीएस सिस्टम, कुछ दिन चलने के बाद हुआ बंद

वाहनों की कमी से दिक्कत

बाइक और गाड़ियों पर जीपीएस सिस्टम चल रहा है। पीसीआर की 77 बाइकें है, जबकि शहर की आबादी ज्यादा है। एक बाइक पर 15 से 17 इलाके हैं। वाहन कम होने से सभी इलाके कवर नहीं हो पाते। – एसएचओ सौदागर अली, इंचार्ज पीसीआर।

 


 

 


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