कश्मीर पर अमेरिका में नहीं गली दाल, अब चीन जाएंगे इमरान खान

Pakistan pm Imran khan will go China wants to attract investors

हाइलाइट्स

  • पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के दौरे पर जाने वाले हैं और वह इस यात्रा में निवेशकों को आकर्षित करने का विचार कर रहे हैं
  • अमेरिका दौरे से वापस आने के बाद इमरान खान ने निराशा जताते हुए कहा था कि दुनिया में कोई भी उनकी बात नहीं सुन रहा है
  • माना जा रहा है कि इमरान खान को समझ में आ गया है कि कश्मीर पर चिल्लाने से कुछ हासिल नहीं होने वाला बल्कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति मजबूत करना सबसे जरूरी है

इस्लामाबाद

कश्मीर मामले में दर-दर भटकने के बाद अब इमरान खान को समझ आ गया है कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच उनकी दाल नहीं गलने वाली। यूएन में भड़काऊ भाषण देने के बाद भी उन्हें भाव नहीं मिला और उन्होंने पाक वापस लौटकर कहा कि भारत एक बड़ा बाजार है इसलिए उनकी बात कोई नहीं सुन रहा है। अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने चीन जाकर निवेशकों को आकर्षित करने की योजना बनाई है। हालांकि पाकिस्तान की माली हालत को देखते हुए यह काम आसान नहीं है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के राष्ट्रपति के साथ बैठक करने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इस महीने बाद में वहां जाएंगे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है। दरअसल पूरी दुनिया में इस समय पाकिस्तान चीन को ही अपने हितैषी के रूप में देख रहा है। यूनाइटेड नेशन में कश्मीर मुद्दे पर भी चीन ने ही पाकिस्तान का साथ दिया था। भारत की कूटनीति ने पाकिस्तान के सभी प्रयास विफल कर दिए और वह खुद ही आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े सवालों से घिर गया।

इमरान खान चीन आठ अक्टूबर को पेइचिंग में चीन-पाकिस्तान व्यापार मंच पर हिस्सा लेंगे। इस यात्रा की सटीक तारीख अबतक सामने नहीं आई है। यह इस साल उनकी तीसरी यात्रा होगी। खान की यह चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कश्मीर को लेकर पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। चीन पाकिस्तान का गहरा मित्र है और उसने कश्मीर मुद्दे पर उसका साथ दिया है।

चीन के विदेशमंत्री यांग यी ने कहा है, ‘यथास्थिति में एकतरफा बदलाव लाने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। भारत और पाकिस्तान का पड़ोसी होने के नाते चीन इस विवाद को प्रभावी तरीके से संभाले जाने की उम्मीद करता है और उसे दोनों पक्षों के बीच संबंधों में स्थायित्व बहाल होने की भी आस है।’

हालांकि यूनाइटेड नेशन में चीन ने भी स्वीकार किया था कि कश्मीर का मामला द्विपक्षीय है और किसी अन्य देश को दखल देने की जरूरत नहीं है। यांग ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था, ‘अतीत से प्राप्त कश्मीर विवाद को संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझाौतों के अनुसार शांतिपूर्ण और उपयुक्त ढंग से हल किया जाना चाहिए।’

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