13 अगस्त को पंजाब बंद का एलान, श्री गुरु रविदास मंदिर तोड़ने के विरोध में

जालंधर :  दिल्ली के तुगलकाबाद में श्री गुरु रविदास मंदिर तोड़ने के विरोध में 13 अगस्त को पंजाब बंद करने की घोषणा की गई है। यह एलान रविवार को पंजाब प्रैस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान आल इंडिया आदि धर्म मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत सतविंदर हिरा व साधु समाज के प्रधान संत सरवण दास महाराज ने की। उन्होंने कहा कि पंजाब बंद का एलान करने से उनका मकसद केवल सरकार को समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होने तथा उनके संगठित होने का एहसास करवाना है।

श्री गुरु रविदास मंदिर तोड़ने के विरोध में 13 अगस्त को पंजाब बंद का एलान
बैठक में शामिल ऑल इंडिया आदि धर्म मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत सतविदंर हिरा व साधु समाज के प्रधान संत सरवण दास।

इस दौरान उन्होंने कहा कि बंद के दौरान पंजाब में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, संस्कार के लिए जाने वाले वाहन तथा मरीजों को लेकर जाने वाली सभी गाड़ियों को राहत रहेगी। इसके लिए समूचे समाज को इन वाहनों के अलावा अन्य जरूरी सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा पेश न करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि दस अगस्त को कोर्ट का फैसला सुनाए जाने के दौरान वह अदालत में मौजूद थे। फैसला आने के बाद सुबह नौ बजे मंदिर तोड़ने की घोषणा की गई थी। जबकि, उनके अलावा संत समाज के सदस्यों को पुलिस ने जबरन उठाकर जंगल में जाकर छोड़ दिया तथा सुबह आठ बजे ही मंदिर तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर में प्रतिष्ठापित श्री गुरु रविदास महाराज की पावन प्रतिमा को बूट पहने हुए लोग उठाकर ले जाते रहे। जिससे समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने मंदिर का फिर से निर्माण न किया तो वह संघर्ष तेज करने को विवश होंगे।

इस मौके पर उनके साथ महंत पुरुषोत्तम, प्रेम पाल सिंह खालसा, ज्ञान चंद व गुरदयाल चंद भट्टी आदि मौजूद थे। इससे पूर्व संत समाज के सदस्यों ने पूर्व सांसद विजय सांपला, विधायक पवन टीनू, विधायक बलदेव खैहरा, पूर्व मेयर सुरिंदर महे, कीमती भगत, सेठ सतपाल मल के साथ बैठक की। इसके उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए विजय सांपला ने कहा कि माननीय अदालत का फैसला आने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष फरियाद की जाती है। इसके लिए जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के समक्ष भी उक्त फरियाद रखी जाएगी। इस मौके पर पवन टीनू ने कहा कि पूरे मामले में दिल्ली की आप सरकार व डीडीए (दिल्ली डवल्पमेंट अथॉरिटी) की भूमिका निराशाजनक रही है।

उन्होंने कहा कि फैसला आने बाद भी डीडीए व दिल्ली की आप सरकार मंदिर बचा सकती थी। जबकि, किसी ने भी इसे गंभीरता के साथ नहीं लिया। अदालत के कई फैसलों को लागू करने में कई-कई वर्ष लग जाते हैं। जबकि, मंदिर मामले में चंद दिनों में ही मंदिर को तोड़ दिया गया है। जिसके चलते आप तथा डीडीए की भूमिका स्पष्ट हो गई है। वहीं, सेठ सतपाल मल ने पूरे मामले की निंदा करते हुए कहा कि जब तक मंदिर का नए सिरे से निर्माण नहीं हो जाता तब तक वह हर मोर्चे पर संघर्ष को तैयार है।

– टीनू ने कहा कि धरने को तैयार, सांपला ने चुप्पी साधी
पत्रकार वार्ता के दौरान पवन टीनू ने स्पष्ट किया कि इस मामले को लेकर व धार्मिक समाज के साथ हर मोर्चे पर खड़े है। भले इसके लिए सड़क पर धरना ही क्यों न लगाना पड़े। वह किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं हटेंगे। जबकि, इसी सवाल पर विजय सांपला ने चुप्पी साध ली व कहा कि वह केवल समाधान चाहते है। इसके लिए वह प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंच करेंगे। उन्होंने कहा कि मकसद केवल मंदिर का फिर से निर्माण करवाना है। इसके लिए वह हर तरह का प्रयास कर रह है।

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