फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी समेत कश्मीर के हालात पर 2 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

Supreme court asks central government for detailed report on Kashmir’s condition in 2 weeks

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कश्मीर के हालात पर 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी
  • नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लेने पर भी केंद्र से जवाब तलब
  • अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कश्मीर में राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर पाबंदी लगाई गई है
  • सुप्रीम कोर्ट ने हालात सामान्य करने, अस्पताल और स्कूल जल्द शुरू करने का निर्देश दिया

नई दिल्ली

जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते में कश्मीर की पूरी तस्वीर सामने रखने का निर्देश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को निर्देश दिया कि राज्य में जल्द से जल्द हालात सामान्य बनाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थिति सामान्य की जाए और स्कूलों व अस्पतालों को फिर से शुरू किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 सितंबर को होगी।

आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने के सरकार के फैसले और नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता व सांसद फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी के खिलाफ भी याचिकाएं दाखिल की गईं हैं। तमिलनाडु के नेता और एमडीएमके के संस्थापक वाइको की याचिका पर सर्वोच्च अदालत ने केंद्र को 30 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिकाओं पर कोर्ट में क्या हुआ, आइए इसे बिंदुवार जानते हैं।

1. मीडिया की आजादी: इंटरनेट, फोन पर केंद्र से जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा कि किस कारण से आपने कहा कि कश्मीर में समाचार पत्र प्रकाशित हो रहे हैं? कोर्ट ने एजी से यह भी पूछा कि कश्मीर घाटी में इंटरनेट और फोन अभी तक काम क्यों नहीं कर रहे हैं? घाटी में कम्युनिकेशन को क्यों बंद किया गया है? इस पर केंद्र ने पीठ को बताया कि कश्मीर स्थित सभी समाचार पत्र संचालित हो रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। AG ने कहा कि दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह इन हलफनामों का विवरण दें।

पढ़ें:कश्मीर पर CJI, जरूरत पड़ी तो खुद जाऊंगा श्रीनगर

AG ने दिया बुरहान वानी केस का उदाहरण

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कश्मीर में आतंकियों के लिए बड़े पैमाने पर पाकिस्तान के हाई कमिशन की ओर से फंडिंग हो रही है। कश्मीर में अशांति फैलाने और पत्थरबाजों को समर्थन देने का काम हो रहा है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद भी राज्य सरकार ने 3 महीने के लिए इंटरनेट और फोन सुविधाओं को बंद कर दिया था। एजी ने कहा कि मौजूदा हालात में इंटरनेट और फोन बंद करने का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया।

2. फारूक केस: ‘ऐसे तो 2 साल बिना सुनवाई हिरासत में रहेंगे फारूक’

उधर, MDMK चीफ वाइको की याचिका पर उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी पर केंद्र सरकार अलग-अलग तर्क दे रही है। सरकार की ओर से कहा गया है कि पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता को नजरबंद किया गया है। इसके तहत 2 साल तक किसी शख्स को बिना सुनवाई के हिरासत में रखा जा सकता है। फारूक केस में सुप्रीम कोर्ट ने आने-जाने और स्वतंत्रता की बात करते हुए केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया है।

दरअसल, वाइको ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के लिए याचिका (हैबियस कार्पस) दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि फारूक उनके निमंत्रण पर 15 सितंबर को चेन्नई में होने वाले पूर्व CM अन्नादुरई के 111वीं जन्मशताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को हटाने के फैसले के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। याचिका में कहा गया है कि उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला से मिलने की इजाजत भी अथॉरिटी से मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।

3. गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर जाने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, जम्मू, अनंतनाग और बारामुला जाने की अनुमति दी जिससे कि वह अपने क्षेत्र के लोगों का हालचाल ले सकें। इससे पूर्व कोर्ट में गुलाम नबी आजाद के वकील ने कहा कि हमें अपने लोगों से मिलने श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जाना है। आजाद ने कहा कि हम वहां राजनीतिक रैली करने नहीं जा रहे हैं। हमें तीन बार एयरपोर्ट से वापस कर दिया गया। हमें अपने गृह जिले में भी नहीं जाने दिया गया।

4. तारिगामी को अपने राज्य जाने की इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने CPI (M) नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को अपने गृह राज्य जम्मू-कश्मीर वापस जाने की सोमवार को अनुमति दे दी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे एवं एसए नजीर की पीठ ने कहा कि यदि एम्स के डॉक्टर उन्हें अनुमति दें तो पूर्व विधायक को घर जाने के लिए किसी की अनुमति आवश्यक नहीं है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि उनका वाहन उनसे ले लिया गया है और वह अपने घर तक सीमित रहेंगे। बीमार नेता को कोर्ट के आदेश के बाद 9 सितंबर को एम्स में भर्ती कराया गया था।

5. J&K हाई कोर्ट:CJI बोले, … मैं खुद जाऊंगा श्रीनगर

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इस आरोप पर रिपोर्ट मांगी है कि लोगों को कोर्ट से संपर्क करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। CJI ने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है और अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद श्रीनगर जाएंगे। हालांकि इस दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले दो ऐक्टिविस्टों की तरफ से पेश वकील से यह भी कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट इससे उलट आती है तो परिणाम के लिए तैयार रहें।

‘5 अगस्त के बाद एक भी गोली नहीं चली’

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 5 अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली है, एक भी शख्स की जान नहीं गई है। कोर्ट को बताया गया कि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक यहां 41,866 लोग जान गंवा चुके हैं, 71038 हिंसा की घटनाएं हुई हैं और 15,292 सुरक्षा बलों को जान गवानी पड़ी।

कुल 8 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में सीपीआई नेता सीताराम येचुरी की भी याचिका पर सुनवाई हुई। सीपीएम नेता एमवी तारीगामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कश्मीर यात्रा के लिए स्वतंत्र हैं। कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर अलग से कोई आदेश नहीं दिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने को चुनौती देने समेत इससे जुड़ी करीब 8 याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई है। इन याचिकाओं में आर्टिकल 370 खत्म करने, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की वैधता और वहां लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गई है। इन्हीं में एक याचिका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की भी है, जिसमें उन्होंने अपने गृह राज्य जाने की इजाजत मांगी है।

जम्मू और कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस (JKPC) पार्टी के प्रमुख सज्जाद लोन ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने और राज्य के पुनर्गठन की वैधता को चुनौती दी है। इसके अलावा बाल अधिकार कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली और प्रफेसर शांता सिन्हा ने भी विशेष दर्जा खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर में कथित रूप से बच्चों को गैरकानूनी रूप से कैद करने के खिलाफ एक याचिका दायर की है।

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